एम आइ टी के होनहार छात्र प्रणव मिस्त्री ने अपनी खोज सिक्स्थ सेंस (यांत्रिक छठी इंद्री) से बाहर के भौतिक जगत को अनूठे ढंग से कमप्यूटर के वर्चुअल ई-जगत के साथ एक सार कर दिया है. एक कैमेरे, एक छोटे प्रोजेक्टर और अपने बनाए एक साफ्टवेयर की मदद से प्रणव कमप्यूटर की विराट कार्यक्षमता और इंटरनेट के अनंत सूचना संसार को आपकी हमारी दुनिया से ऐसे मिला देते हैं के बस सोचने की मेहनत ही करनी होती है और कुछ शारिरिक भंगिमाओं/मुद्राओं (जेस्चर्स) की मदद से काम निपट जाता है. अगर राह में कोई फोटो लेना हो तो दोनो हाथों से एक खास मुद्रा बनाईये और सिक्स्थ सेंस का कैमेरा चित्र खींच लेगा. चित्र में सशोधन या उसे निकाल फेंकने के लिए पास की किसी दीवार पर सिक्स्थ सेंस के प्रोजेक्टर से छवि प्रक्षेपित कीजिए और मनचाहा संशोधन कर डालिए . आप इसके जरिए फोन कर सकते हैं खरीदारी करते हुए चीज़ के बारे में पड़ताल कर सकते हैं कही जाने के लिए अपनी टिकट जाँच सकते हैं और तो और जब किसी से मिलें तो उसी व्यकित के शरीर पर उसके बारे में इंटरनेट पर उपलब्ध जानकारी प्रोजेक्ट हो जाती है ताकि आप व्यक्ति की रुचियों और स्वभाव को बेहतर ढंग से पहचान सकें. हाथ में अखबार हो कोई साधारण कागज़ या फिर किसी का शरीर ही सही यानि कुल जमा कोई तल होना चाहिये जिसपर छवि प्रक्षेपित की जा सके और बस अब नेट सर्फ करें या फिल्म देखें गेम खेलें या खरीदारी करें. इस होनहार भारतीय ने ना सिर्फ इस विलक्षण तकनीक को जन्म दिया है बल्कि बड़ी-बड़ी कंपनियों के आफर्स को ठुकरा कर जनसामान्य की सेवा में इस तकनीक को मुफ्त वितरित किया है.टेड पर इस तकनीक का पूरा वीडियो उपलब्ध है आप Interactive Transcript पर हिन्दी चुन कर चर्चा का हिन्दी तरजुमा भी देख सकते हैं.




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