गुरुवार, 10 मार्च 2011

अनीश कपूर : निराकार को उघारता कलाकार


कला जीवन को देखने की नई दृष्टि देती है, जीवन को परखने के नए माध्यमों से परिचित कराती है और इस तरह हमें जीवन के नए आयामों तक ले जाने का माध्यम बनती है मगर ऐसे कलाकार बिरले ही मिलते हैं जो अपने समय को  पुनर्परिभाषित करते हैं और जनचेतना को झकझोर कर उसकी संवेदना के तल को एक क्वांटम लीप में ले जाते हैं.
भारतिय मूल के ब्रिटिश कलाकार अनीश कपूर अपने काम से युग को परिभाषित करने की क्षमता रखने वाले ऐसे ही कलाकार हैं.
अनीश अपनी क्रितियों के माध्यम से प्रेक्षक को निराकार के ऐसे जगत में प्रतिस्थापित कर देते हैं जहाँ देखने के भाव के साथ साथ दर्शक भी विलीन हो जाता है और अस्तित्व की लय के साथ सिर्फ होने का सुखद भाव ही अनुभूति की त्वरा के पास बच जाता है.


उनकी क्रितियों की परावर्तक सतह से कभी वस्तुओं का आकार परिवेश की छाया में ऐसे गुम हो जाता है के वस्तुएँ अपना आकार और आयाम खो देती हैं तो कभी किसी कलाक्रिति के तल को वो ऐसी दिशा में ले जाते हैं के दर्शक का मन निर्विचार के अतल में खो जाता है.
एक सार्थक कलाक्रिति को आत्मसाध करने के बाद दर्शक का रिफरेंस बिंदु बदल जाता है. अनीश ऐसे युगदृष्टा कलाकार हैं जो आम प्रेक्षक को भी निराकार का दृष्टा बना देते हैं.

चित्र - गूगल,बिंग,फ्लिकर और अनीस कपूर के वेब साईट से साभार




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